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प्रमुख नदी घाटी परियोजनाएं

प्रमुख नदी परियोजनाएं भाखड़ा नांगल परियोजना – सतलुज नदी  पंजाब हरियाणा राजस्थान हिमाचल प्रदेश व्यास परियोजना – पंजाब हरियाणा राजस्थान हिमाचल प्रदेश दामोदर नदी घाटी परियोजना – झारखंड पश्चिम बंगाल हीराकुंड बांध परियोजना – महानदी – उड़ीशा चंबल परियोजना – मध्य प्रदेश राजस्थान तुंगभद्रा परियोजना – आंध्रप्रदेश तेलंगाना  मयूराक्षी परियोजना – पश्चिम बंगाल

प्रमुख पुस्तकें

 प्रमुख पुस्तकें  पंचतंत्र  - आचार्य विष्णु शर्मा  प्रेमवाटिका - रसखान मृच्छकटिकम  - शूद्रक  नेचुरल हिस्ट्री - प्लीनी  कामसूत्र  - वात्सायन  बुद्धचरितम - अश्वघोष  कादम्बरी  - बाणभट्ट  शाहनामा  - फिरदौसी  हुमांयुनामा - गुलबदन बेगम  साहित्य लहरी - सूरदास  श्रृंगार शतक , नीति शतक   - भर्तृहरि  गीतांजलि - रविंद्रनाथ टैगोर  भारत भारती - मैथलीशरण गुप्त   यामा - महादेवी वर्मा  कामायनी  - जयशंकर प्रसाद  भगवद गीता, महाभारत - महर्षि वेदव्यास  एशेज ऑन गीता  - अरविन्द घोष  मुद्राराक्षस - विशाखादत्त  अष्टाध्यायी - पाणिनि  मिताक्षरा - संत विज्ञानेश्वर  राजतरंगिणी   - कल्हण  अर्थशास्त्र - चाणक्य  गीतगोविन्द - जयदेव  पद्मावत - मालिक मोहम्मद जायसी  अकबरनामा - अबुल फजल 

विविध तथ्य

 विविध तथ्य  प्रमुख भारतीय संस्थान प्रमुख पुस्तकें प्रमुख नदी घाटी परियोजनाएं  

प्रमुख भारतीय संस्थान

 प्रमुख भारतीय संस्थान  भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान - नई दिल्ली  भारतीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान - कोयंबटूर  भारतीय तम्बाकू अनुसन्धान संस्थान - राजमुंदरी  भारतीय डेयरी अनुसंस्थान संस्थान - करनाल भारतीय औषधि अनुसन्धान संस्थान - लखनऊ  भारतीय चीनी तकनिकी संस्थान  - कानपूर  भारतीय परमाणु अनुसन्धान संस्थान - ट्राम्बे  टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च  - मुंबई 

Topic 1 - Lesson 1 - Paper I

टॉपिक 1 - भारत का इतिहास  - हड़प्पा सभ्यता से 10  वीं सदी तक भारत का राजनैतिक , आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक इतिहास 

Chapter - 3 ऐतिहासिक स्रोतों के प्रकार

 ऐतिहासिक स्रोतों के प्रकार  ऐतिहासिक स्रोतों के प्रकार  भौतिक -  पत्थर के मंदिर जैसे दक्षिण भारत में,  ईंटों के विहार पूर्वी भारत ,  ----------------------------------------------------------------------- धरती पर टीला - इसमें विभिन्न संस्कृतियों का कालक्रम  के अनुसार विवरण मिल जाता है।  टीलों की खुदाई दो तरह से होती है अनुलम्ब और क्षैतिज। क्षैतिज खुदाई अधिक खर्चीली होती है इसलिए कम की गयी हैं।   अनुलम्ब खुदाई में सीधे लंबवत निचे की और खोदा जाता है जिससे विभिन्न संस्कृतियों का कालक्रम का पता चलता है।  उत्खनन से भौतिक जीवन का सही चित्र नहीं मिल पता।  क्योंकि जो पुरावशेष मिलते हैं वो उसी अनुपात में सुरक्षित नहीं होते।  जैसे पचिमी भारत में सुखी जलवायु के कारन पुरावशेष सुरक्षित मिल जाते हैं लेकिन जहाँ नाम और आर्द्र जलवायु है जैसे पूर्वी भारत में तो वहां पर अवशेष उतने सुरक्षित नहीं हैं  पुरातत्व  - एक ऐसा विज्ञान है जिसमें पुराने टीले का क्रमिक ढंग से उत्खनन किया जाता है जिससे प्राचीन काल के लोगों के भौतिक जीवन के बार...